मुझे मेरे बचपन की याद दिलाते है...
जब परेशानी के समंदर में तैरता हूँ
वो मेरा ह्रदय बहलाते है
वो नन्हे हाथ
मुझे मेरे बचपन की याद दिलाते है...
जब लड़ थक कर हारा सा लगता हूँ
उसकी छोटी सी हिम्मत
मुझे फिर से लड़ने की ताकत दे जाते है
वो नन्हे हाथ
मुझे मेरे बचपन की याद दिलाते है॥
जब हिचकते है अपनों से बताने
उनका मासूम alahrpan
हमें बिना कुछ कहे
बहुत saari बात कह jaate hai
वो नन्हे हाथ
मुझे मेरे बचपन की याद दिलाते है...
जब अपने सपने अधूरे लगने लगते है
वो आसमा में घर बनाते है
हमें उसे पूरे करने की आस दे जाते है
वो नन्हे हाथ
मुझे मेरे बचपन की याद दिलाते है...
This poem is dedicated to my one & half of year old nephew. We can learn many small things from childrens...they are innocent, struggler ....
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